Sunday, March 27, 2011

दोहरे मापदंड

इसमें किसी को शक नहीं है कि कर्नल गद्दाफी ने अपनी ही जनता के विरूद्ध अमानवीय अत्याचार किये हैं। लीबिया के हर घर से सरकार विरोधियों का सफाया करने की धमकियां गद्दाफी कई बार दे चुके हैं। परन्तु लीबिया के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के माध्यम से वहां शांति और लोकतंत्र कायम हो सकेगा, इसकी उम्मीद करना बेमानी होगा। दुनिया धीरे-धीरे यह समझ रही है कि पश्चिमी देशों ने अपने हित संवर्धन के लिये लीबिया में वही किया है जो पहले अफगानिस्तान और इराक में किया गया था। लीबिया के नागरिकों को गद्दाफी के कहर से बचाने की पश्चिमी देशों की दलीलें आकर्षक जरूर हैं लेकिन खोखली भी हैं। अगर जनता की रक्षा ही हस्तक्षेप का कारण है तो बहरीन और यमन पर पश्चिमी देशों की आपराधिक खामोशी की क्या वजह है, जहां लोकतांत्रिक क्रांति को बेरहमी से कुचल जा रहा है। दरअसल बहरीन और यमन में दोहरे मापदंड इसलिये अपनाये जा रहे हैं क्योंकि वहां के सत्तारूढ़ तानाशाहों की हैसियत अमरीका की कठपुतलियों से ज्यादा नहीं हैं।

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